मुझे स्वीकार कर लो
ख़्वाब कितने है अधूरे तुम नहीं तो प्रीत गई ,
नाराज़गी अब तुम्हारी मुझसे फिर जीत गई ,
हो दुनिया में अकेले अब मुझे संसार कर लो ,
कब तक अकेले जलते रहेंगे अब मुझे स्वीकार कर लो ।
कह दिया तुमने मुझे बिन सोचे समझे बेवफ़ा ,
गुनाह हो मेरा कहो कुछ यूं ना हो मुझसे खफा ।
मेरे जिस्म मेरी ज़िन्दगी पर अब तुम्हीं अधिकार कर लो ,
कब तक अकेले जलते रहेंगे अब मुझे स्वीकार कर लो ।
हो गई जो मै सीता सी होगा ज्वलन असहनीय तुमसे ,
राम बन कर दिखाओ गर चाहते हो सीय हमसे ,
रिश्ते ज़हरीले नहीं है अब तो मुझसे प्यार कर लो ,
कब तक अकेले जलते रहेंगे अब मुझे स्वीकार कर लो ।
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