मत छुपाओ तुम अपने गुनाहों को ।

मत छुपाओ तुम अपने गुनाहों को ,
ज़िंदा रहना है तो थमा दो पतवार जुलाहों को ,

दरिया ए इश्क़ पार करना आसान लगता है ,
डुबा बैठोगे साथ अपने निबाहों को ।

दिल उकता गया है हमसे तुम्हारा गर ,
जाओ , बना लो आशियाना किसी के बाहों को ।

इतना शर्माना बेवफ़ा का ठीक नहीं ,
मत झुकाओ अपनी निगाहों को ।

तैराकी काम नहीं आती तूफ़ानी लहरों में ,
तवायफ डुबा दी है कई बादशाहों को ।

हिमाकत ही ना की जब मंजिल पाने की ,
फ़िर क्या कोसना इन बेकसूर राहों को ।

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