सुना है तुम शहर से बाहर जा रही हो

सुना है तुम शहर से बाहर जा रही हो ,
किसको दिल से अपने बाहर किए जा रही हो ,

ऊब चुके है हम इस अकेलेपन से यहां ,
ये बताओ की मेरे पास कब तक आ रही हो ।

दुप्पटा चादर क्या क्या लपेटे रखी हो ,
चेहरा दिखाओ मुझसे क्यों शर्मा रही हो ।

शादी की तारीख किससे तय कर आईं ,
ये कैसा इश्क़ है जो तुम मुझसे निभा रही हो ।

खिड़कियों से नज़रें गैरों को तकने लगी है ,
कोई नया आशिक़ है जिससे दिल लगा रही हो ।

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