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Showing posts from April, 2020

ख्वाबों में भी तुम्हे हम देखना छोड़ देंगे

ख्वाबों में भी तुम्हें हम देखना छोड़ देंगे , तुम कहो तो फिर हम जीना छोड़ देंगे , अभी दूर हूं तो देख सब उछल रहे है इतना , तेरे जब साथ होऊंगा तो सब पसीना छोड़ देंगे । भरोसा है तो उसके सामने हाथ सब फैला रहे है , टूट जाए गर तो जाना मंदिर मदीना छोड़ देंगे । मयखाना भी खाली होने को आ पहुंचा , याद ना आए तेरी तो फिर हम पीना छोड़ देंगे । चांद की चमक भी फीकी पड़ गई है तेरे सामने , तू मिल जाए गर तो हम दफीना छोड़ देंगे । मिल जाएगा गर मुझसे ज्यादा चाहने वाला , बता देना , तेरी नज़रों का हम तखमीना छोड़ देंगे ।

मिरि पीठ पर थूके हुए कई दाग अब भी है

कहने को है कि हर शख़्स इज़ाफ़त ही करता है , अपने कर्मों पर ! कौन है यहां जो आज खिफ्फत ही करता है । मिरि पीठ पर थूके हुए कई दाग अब भी है , दुनिया सामने होती है तो वो भी जियाफत ही करता है । सामने वो हां में बस हां ही मिलाता है , पीछे मुड़ते हर शख़्स ख़िलाफत ही करता है । उसके इश्क़ में हिज्र की कई रातें गुजारी है , अब भी वो मेरे इश्क़ की मुखालिफत ही करता है। है नाराज़गी मुझसे तो बढ़िया है और होने दो , मिलन की रात वो मिलता नहीं बस आफ़त ही करता है । ये जो लोगों ने इश्क़ के नाम की दुकानें खोल रखी है , हर शख़्स बस हवस मिटाने का हिर्फत ही करता है ।।

अब्सार तरसते है

यूं ही खाली क्यों बैठे है आओ कुछ कर गुजरते है , इश्क़ खत्म हुआ गर तो दुबारा फिर से करते है । सुना है कोई वबा आई है जो तुम इतना दूर रहती हो , जुदा होकर भी मरना है तो आओ फिर साथ मरते है । अभी तो होंगे भरे रखे वो पाउडर क्रीम के डिब्बे , हम आए तो वो खाली हो सब हमें देख संवरते है । जो तुमने इक बार तोड़ा दिल अब तल्ख़ सही से जुड़ ना पाया है , कोई अब छू भी देता है हजारों टुकडों में बिखरते है । कभी तो आंखों से ओझल ना होने का नाम लेती तुम  , इक तेरी झलक देखने को ये अब्सार तरसते है ।।

वो आशिक़ नहीं एक जुआरी है

जो हालत इधर है क्या वही तुम्हारी है , तुझपे क्या खर्च कर दे जब अब तल्ख़ बेरोज़गारी है , कोई और है ज़िन्दगी तेरी तो सब सफा कह दो मुझे , बेवफा दिखाना खुद को अच्छी अदाकारी है । तब्दीर करे तुम जो इश्क़ करती हो , ये सौदा है और कहती हो लाचारी है । देख कर नज़रें फेर लेना , तुम्हारे इश्क़ की अच्छी खातिरदारी है । तुम्हारी खिड़कियों पर नज़रें यूं गड़ाए रखना , तुम्हे देखने की कसक अभी भी जारी है । वो तुम्हारे जिस्म से खेलने का सौदा कर आया , वो आशिक़ नहीं एक जुआरी है । चोट करना हो तो डंडे की चोट कर लो मुझपर , इस ज़ुबां की चोट बहुत करारी है । आब - ए - तल्ख़ पीकर भी भुलाना चाहा तुमको , तुम हो इक और तुम्हारे यादों की खुमारी है ।।