बेवफ़ा हो बेवफ़ा तुम

साथ थे अब इससे बढ़कर और शोहरत लो गी क्या ?
बेवफ़ा हो बेवफ़ा तुम और गैरत लो गी क्या ?

इश्क़ में क्या सोचना , क्या मैं तेरे काबिल नहीं ,
मां से बढ़कर इस जहां में बड़ा भी वो अफजल नहीं ,
बीते ज़िन्दगी के साल कितने और मोहलत लो गी क्या ?
बेवफ़ा हो बेवफ़ा तुम और गैरत लो गी क्या ?

टूट कर तुमको था चाहा तुमसे प्यार था किया ,
तुम पर ही सब था लुटाया तुमपर ऐतबार था किया ,
खुद की जां पर बन आई अब और रहमत लो गी क्या ?
बेवफ़ा हो बेवफ़ा तुम और गैरत लो गी क्या ?

दर पर सबकी हो भटकती किसने ठुकराया नहीं ,
मेरी चौखट ज्यों तुम लांघी फिर किसीने अपनाया नहीं ,
दूर सबसे हो गई हो अब तुम हिज़रत लो गी क्या ?
बेवफ़ा हो बेवफ़ा तुम और गैरत लो गी क्या ?

तोहमतें इतनी लगी फिर भी कोई शिकवा नहीं ,
उड़ा ले जाए जो हमको ऐसा कोई तूफां नहीं ,
मुझको भी तुमने अब बेचा और दौलत लो गी क्या ?
बेवफ़ा हो बेवफ़ा तुम और गैरत लो गी क्या ?

Comments

Popular posts from this blog

कहिया मिलन होई मोर सजनिया ...

तेरे गाल के एक बोसा ने मुझको पागल कर डाला ....

वो खत ।