अब्सार तरसते है
यूं ही खाली क्यों बैठे है आओ कुछ कर गुजरते है ,
इश्क़ खत्म हुआ गर तो दुबारा फिर से करते है ।
सुना है कोई वबा आई है जो तुम इतना दूर रहती हो ,
जुदा होकर भी मरना है तो आओ फिर साथ मरते है ।
अभी तो होंगे भरे रखे वो पाउडर क्रीम के डिब्बे ,
हम आए तो वो खाली हो सब हमें देख संवरते है ।
जो तुमने इक बार तोड़ा दिल अब तल्ख़ सही से जुड़ ना पाया है ,
कोई अब छू भी देता है हजारों टुकडों में बिखरते है ।
कभी तो आंखों से ओझल ना होने का नाम लेती तुम ,
इक तेरी झलक देखने को ये अब्सार तरसते है ।।
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