वो आशिक़ नहीं एक जुआरी है

जो हालत इधर है क्या वही तुम्हारी है ,
तुझपे क्या खर्च कर दे जब अब तल्ख़ बेरोज़गारी है ,

कोई और है ज़िन्दगी तेरी तो सब सफा कह दो मुझे ,
बेवफा दिखाना खुद को अच्छी अदाकारी है ।

तब्दीर करे तुम जो इश्क़ करती हो ,
ये सौदा है और कहती हो लाचारी है ।

देख कर नज़रें फेर लेना ,
तुम्हारे इश्क़ की अच्छी खातिरदारी है ।

तुम्हारी खिड़कियों पर नज़रें यूं गड़ाए रखना ,
तुम्हे देखने की कसक अभी भी जारी है ।

वो तुम्हारे जिस्म से खेलने का सौदा कर आया ,
वो आशिक़ नहीं एक जुआरी है ।

चोट करना हो तो डंडे की चोट कर लो मुझपर ,
इस ज़ुबां की चोट बहुत करारी है ।

आब - ए - तल्ख़ पीकर भी भुलाना चाहा तुमको ,
तुम हो इक और तुम्हारे यादों की खुमारी है ।।

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