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बेवफाई को इतना बेकरार क्यों हो ?

इश्क़ में हमारे कर्ज़दार क्यों हो ? बेवफाई को इतना बेकरार क्यों हो ? मेरे जाने से बोझ हल्का हो गया , मगर अब भी तुम गम-ख्वार क्यों हो ? अश्क, आंखों की चौखट तक आकर पूछते है , अब भी तुम मेरे शहरयार क्यों हो ? नदी उस पार कर दूं तो रुखसत हो जाओगी, दानिस्ता पूछती हो बीच मझधार क्यों हो ? इश्क़ किसी से हो , वफ़ा का चर्चा हो , आजकल विज्ञापन से अख़बार क्यों हो ?

गिरते गिरते पलकों से तेरी

दर्द , तूने जो दिए दिल में रहने लगे है , आखों के आंसू गम कहने लगे है ।। साहिल पे दिन ढलते चलती फिजाएं , ज़ुल्फो से तेरी होकर बहने लगे है ।। मुस्काती हो सुन कर उनकी ज़ुबाने ख्वाहिश दिल के बदलने लगे है ।। बांधे जो तूने झूठे पुलिंदे, पहली ही बारिश में ढहने लगे है ।। उनकी ही बातें दिन ओ रातें , दिल में जो तेरे अब रहने लगे है ।। गिरते गिरते पलकों से तेरी , ‘गुमनाम’अब गिरकर संभलने लगे है ।।

मोहब्बत में सियासत नहीं देखी जाती

रूढ़िवादी रिवायत नहीं देखी जाती , मोहब्बत की झूठी रिसालत नहीं देखी जाती , कह रही थी उससे कोई ताल्लुक ही नहीं , उसके बाहों में तेरी शरारत नहीं देखी जाती ।। शरीफों की महफ़िल और लबों पर बोसा, हाय! ऐसी शराफत नहीं देखी जाती ।। तेरी ज़ुल्फ के छांव में उसका बैठ जाना , मुझसे तेरी इजाज़त नहीं देखी जाती ।। नाकामी आते ही तेरा चला जाना  , मोहब्बत में सियासत नहीं देखी जाती ।। न रखिए मोहब्बत के ताल्लुक हमसे , वफ़ा से बगावत नहीं देखी जाती ।। झूठों के तहों से जो एक झूठ लाई हो , उफ्फ़ ! ये वकालत नहीं देखी जाती ।।

दूर के ढोल क्या सुहाने लगे

दूर के ढोल क्या सुहाने लगे , अब हमको वो इश्क में आजमाने लगे , कुछ नाकामियों के बाद जानाँ , तुम्हें और रिश्ते पसंद आने लगे ।।    रिश्ते तोड़ने की रस्म अदायगी हो ,  बनाने में जिसको ज़माने लगे ।। मैंने सोचा की जिंदगी बसर होगी , इश्क करके अब पछताने लगे ।। कोई हो तुम्हारा तो तुमसे पूछे , बिछड़ने पर कितना याद आने लगे ।। तुम्हारे ख्वाब से फुर्सत मिलते , तुम्हारे ख्याल के शामियाने लगे ।।

एक खूबसूरत ज़ालिम रिश्तों में पड़ गया

बिना बात के ही वो मुझसे झगड़ गया , बिछड़ना चाहता था वो , सो बिछड़ गया , हर आंच बुझ गई हैं ताल्लुकातों की , एक खूबसूरत ज़ालिम रिश्तों में पड़ गया ।। रिश्तों सी फिसलन इन हाथ में न थी , गिरते हाथ थाम लेता मगर वो बढ़ गया ।। सुनाने आए थे किस्से वफ़ा के तेरे , वो दरख़्त हवा चलने से पहले उखड़ गया ।। गमज़दा होने की क्या अदाकारी की , ये दुःख ‘गुमनाम’ गले ही पड़ गया ।।

ध्यानी राजा

राज कार्य छोड़ एकांत में बैठ कर ध्यान कर रहे राजा दर्पण को जब ज्ञान की प्राप्ति हुई और यह जाना दुनिया में सत्कर्म की जगह बुरे कर्मों का बोलबाला क्यों हो रहा है तो वे सीधे वापस अपनी राजधानी लौट आए । राजा के राज्याभिषेक की घोषणा हुई और राजा को दुबारा गद्दी पे देखने के लिए जनता लालायित हो उठी और जिन्हें पिछली बार राजा में बुराई दिख रही थी वे भी इस बार राजा से प्रभावित होकर जन समर्थन का प्रदर्शन करने राजा के महल के बाहर पहुंच गए । पुनः राज्याभिषेक के बाद जब राजा का भाषण हुआ तो उन्होंने कहा कि लोगों के दुखों का कारण है दुखी होने के भाव और दुखी होने का शब्द , तो जिस शब्द से व्यक्ति दुखी होने के भाव को प्रकट कर पाए वो शब्द ही अगर शब्दकोश से निस्तारित कर दिए जाए तो लोगों के दुखों का अंत किया जा सकता है । राजा के भाषण के बाद कई विद्वान आए और शब्द की तलाश की गई और शब्दों को शब्दकोश से हटाया जाने लगा । चोरी , छीना झपटी , दुःख , पीड़ा , द्वेष , भ्रष्टाचार , भ्रष्टाचारी , छिनैती , डकैती , डकैत , चोट , चपेट , दर्द , पीड़ा , अन्य कई शब्दों को शब्दकोश से हटा दिया गया । लोग राजा के वापस आने पर बेहद प्र...

हुक्मरान

गौ माता के संरक्षण के लिए ट्वीट किए एक नेता के घर में जब लोग गौ संरक्षण की सीख लेने पहुंचे तो चार विदेशी नस्ल के कुत्तों का संरक्षण होते मिला । नेता जी से मिलने के लिए ज्ञापन दिया तो नेता जी के पीए ने बताया नेता जी अभी ज़रूरी मीटिंग में व्यस्त है थोड़े ही देर में आपसे मिलने आएंगे । दो नौकर अलग से कुत्तों की सेवा में लगाए गए थे और भौंकने पर खुद नेता जी भागकर आते देखते , चूमते और दुलारने लगते । इतने में भीड़ में खुसफुसाहट शुरू हो गई और जब लोगों के कई घंटों तक इंतज़ार करने पर नेता जी लोगों के पास नही आए और थक जाने के बाद लोग वापस जाने लगे तो भीड़ से ही एक व्यक्ति बोला की हमने अपना हुक्मरान चुना और नेता जी ने अपना ।।