दूर के ढोल क्या सुहाने लगे

दूर के ढोल क्या सुहाने लगे ,
अब हमको वो इश्क में आजमाने लगे ,

कुछ नाकामियों के बाद जानाँ ,
तुम्हें और रिश्ते पसंद आने लगे ।।
 
 रिश्ते तोड़ने की रस्म अदायगी हो ,
 बनाने में जिसको ज़माने लगे ।।

मैंने सोचा की जिंदगी बसर होगी ,
इश्क करके अब पछताने लगे ।।

कोई हो तुम्हारा तो तुमसे पूछे ,
बिछड़ने पर कितना याद आने लगे ।।

तुम्हारे ख्वाब से फुर्सत मिलते ,
तुम्हारे ख्याल के शामियाने लगे ।।

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