दर्द है , शायद वो सहने लगी है अब

दर्द है , शायद वो सहने लगी है अब ,
कुछ खफा - खफा - सी मुझसे वो रहने लगी है अब ,
 
ख़ामोश होकर मुर्दा - सी पड़ी रहती थी ,
ज़ुबां भी कुछ कहने लगी है अब ।

कह दो हवा से की वो थम जाए ,
चिंगारी फ़िर भड़कने लगी है अब ।

गुज़ारे थे कुछ पल साथ उसके ,
ख्वाबों में भटकने लगी है अब ।

तस्वीरों को आंखों में कैद करके रखा था ,
बूंदे बनकर मिटने लगी है अब । 

दिल के किवाड़ खटखटाए थे कभी ,
आंखों में खटकने लगी है अब ।

मुझसे दूर रहो सब कहते थे उसे ,
साथ होने में झिझकने लगी है अब ।

मुझसे मिलने का समय नहीं उसको ,
किसी और से इश्क़ करने लगी है अब ।

समय गुजर रहा इंतजार में उसके ,
पलकें भी झपकने लगी है अब। 

ज़ुल्म सहते - सहते इन मौसमों का ,
छते भी टपकने लगी है अब ।

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