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Showing posts from 2019

तेरी बेवफ़ाई छुपाई भी नहीं जाती ।।

लगी थी जो आग अब बुझाई भी नहीं जाती , ईंटे पक गई है , दीवार अब ढहाई भी नहीं जाती । क्या लगाते मलहम उनके जलों पर हम , मुझसे तो अब आग लगाई भी नहीं जाती ।। सुकून मिलता गुजरती नज़रें इब्तिसाम से उसकी , कम्बख़त अब तो नज़र उठाई भी नहीं जाती ।। मिरे हालों पर उन्हें ज़रा भी इज्तिराब नहीं , बात अब तो उनसे बताई भी नहीं जाती ।। बादलों ने तो पूरा चांद ही छुपा रखा है , इक मुझसे तेरी बेवफ़ाई छुपाई भी नहीं जाती ।।

एक किताब हमारे दिल की भी है

एक ज़माना था कि था ज़माना साथ मेरे , आज पूरे शहर में भी कोई यार ही नहीं । एक किताब हमारे दिल की भी है , कम्बख़त कोई पढ़ने को तैयार ही नहीं । डूबा था कई रोज़ पुरानी शराब के इक बादिया में मगर , उससे ज्यादा किसी में खुमार ही नहीं । शहजादी थी वो मेरी मेरे लिए लेकिन , मै उसकी खातिर उसका शहरयार ही नहीं । अब वो परवाह नहीं करती तो ना सही , वो भी परवाह ना करे फिर परवरदिगार ही नहीं । वो शादी से पहले सब नापाक समझती थी , मेरे साथ तो ऐसा कोई इकरार ही नहीं । वो खिलौना समझ इधर उधर रख देती थी  , मुझे भी उसकी इस हरकत पर गुबार ही नहीं । और तिरी मोहब्बत का सिरदर्द पालती क्यों ' अम्बर ' जब उसे तुझसे प्यार ही नहीं ।।

तेरी ज़ुबां बहुत है ।

तेरी खामोशी के लफ़्ज़ निहां बहुत है , हर मुस्कुराहट के पीछे ये दिल परेशां बहुत है , न'अश समझ कर तुम दफनाने चली हो , बुलाओ तो सही अभी जां बहुत है । तेरे गालों को चूमने का अफसोस नहीं ...

कह दिया है इश्क़ है ।।

तुमने उससे दिल लगाकर कह दिया है इश्क़ है , तुमने मेरा दिल जलाकर कह दिया है इश्क़ है , तुम हो वही ना जो कहती कभी थी कि क्या आजमाना इश्क़ में , तुमने मुझको आजमाकर कह दिया है इश्क़ है ...

देख वो मेरा जान ए बसर आया है

जो छुपा था शर्माकर बादलों में कहीं अब निकल वो क़मर आया है , चकरोड़ें अब खामोश पड़ने लगी शायद उससे मिलने का पहर आया है , अब छेड़ो तराना दूसरा कोई यार मेरे , उसकी बातों से मेरा गला ...

बुझा गया कोई हर प्यास अब मेरी प्यास कहां तुझमें

इजाज़ - ए - वक़्त का ही हश्र है कि वो इख्लास कहां तुझमें , बुझा गया कोई हर प्यास अब मेरी प्यास कहां तुझमें । गश - ए - इश्क़ में हम यहां अब तल्ख़ ना होश आया है , वो खुश है अभी तुझसे नया जो ...

बस अपनों पर यहां कीचड़ उछल जाएगा ।।

ख़िज्र-ए-इश्क़ है दिल में निकल जाएगा , अभी नादान है वो संभल जाएगा , ताबिश-ए-हुस्न को ढक कर रखो , ये दिल मोम है फिर पिघल जाएगा । किस्सा-ए-इश्क़ में सांस बाकी है , अभी थोड़े ही धूल में म...

तुम्हारे होंठ पर वो तिल बहुत ही कातिलाना है ।।

अब अपनी मुस्कुराहट से फिर किसको लुभाना है , फिर झुकी पलकों से किसका दिल जलाना है , समय साथ था तब भी और वो आज भी है पर , इत्तिका थी कभी तुम आज मय का ज़माना है । आओ जो शौकीन है पीने का ब...

कुछ भी ना लिखूं

यहां तन्हा - सा बैठा मैं ज़रा सोचूं की क्या लिखूं , पुराने ज़ख्मों की यादें या पुराने जख्म ही लिख दूं । देखा नजर में उनकी तो दौड़ चमक सी गई , लिखूं क्या मोहब्बतों की यादें या महब...

कोई माखन लेकर आएगा ।।

उस गरीब की बस्ती में कोई उजियारा करने आएगा , वो कोई मोदी सोनिया नहीं ना गांधी ही कहलाएगा  । कैसे कर रही है रातें कैसे बीत रहे है दिन , उसकी दर्द कहानी को सुनने कोई आएगा । राह देख...

क्यों ??

सांत्वना देते हुए यूं भाव विभोर हो जाते हो , टूटे हुए अंतरिम हृदय का अंदरूनी शोर हो जाते हो , खिलखिला चहकते हुए मुखातिब चांद से हो जाते हो , आंचल में पालने वालों से बेचलन व बोर ह...

शायद मुझको इश्क़ हो गया है

उसी की बातें रहती है ज़ुबां पर , शायद मुझको इश्क़ हो गया है , तस्वीर ख्वाब में नजर आसमां पर , शायद मुझको इश्क़ हो गया है । नज़रों को पलको से यूं छुपाती है वो , चाहत हर पर नज़रों से द...

फिर कभी

ठीक है, तुम रोज़ बातें ना करो मुझसे , लेकिन करती रहा करो मुझसे बातें कभी । बिन तेरे , बीत गई है रातें कई  , और बीत जाएंगी ये तारीखे कभी । वक़्त लंबा गुज़र गया है , आओ हम रूबरू हो जाए क...

यह इक्कीसवीं सदी का भारत है

देश चरित्र कहां जा पहुंचा दुष्कर्मियों के सायों में , या सत्ता पर काबिज बैठे अपराधियों के छायों में । यह इक्कीसवीं सदी का भारत है पूजनीय गाय काटी जाती है , बंद कमरों में लाच...

आओ बोल दे वो बातें जो कबसे ज़ुबां पे लाए बैठे है ।

एक दर्द है दिल में कबसे दबाए बैठे है  , इश्क भी उनसे कबसे जताए बैठे है , वो बाखबर हो कर भी बेखबर है , हम ही उनसे सारे वायदे निभाए बैठे है । हारे तो उसको पहले ही दिन थे यारों , लेकिन अब भी उसको इश्क़ में जिताए बैठे है । माना की वो सबसे खूबसूरत नहीं लेकिन , दिल तो हम अपना उनसे ही लगाए बैठे है । वो होठों के ऊपर तिल , और उसकी मुस्कुराहट , इन्हीं पर तो हम अपने होश गवाए बैठे है । और वो आंखों का काजल , जुल्फों का बिखरना , भीगे बालों पे तो उसके अपने दिल लुटाए बैठे है । अश्क भी उसकी यादों के साए में , इन आंखों पर कितने सितम ढहाए बैठे है । गाल पे उसकी इक बोसे की खातिर , यहां कितनों के हम दिल जलाए बैठे है । मिलता है उसके छुअन से सुकून मुझको , कबसे हम इन उंगलियों को तरसाए बैठे है । जानता हूं कि तुझको भी मिलता है सुकून बात करने पर , आओ बोल दे वो बातें जो कबसे ज़ुबां पे लाए बैठे है ।