हक़ीक़त थे जो सारे अब फ़साने हो गए ।
कभी तेरे थे अब किसी और के ठिकाने हो गए ,
कभी रहे प्याले आज मयखाने हो गए ,
मेरा तकना और तेरा मुस्कुरा जाना ,
हक़ीक़त थे जो सारे अब फ़साने हो गए ।
क्या हो गया कि हम बेगाने हो गए ।
उस रात मुलाकात का सच बस इतना था ,
नज़र मिली और हम तेरे दीवाने हो गए ।
कितनी नज़रों से बचा कर रखा तुमको ,
जिनसे बचाया उनके हम निशाने हो गए ।
ख्वाबों में ही तुमसे मिलना हो पाता था ,
नींद को भी आए कई ज़माने हो गए ।
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