बेवफा कह कर सबको दिखलाया नहीं जा रहा ।।
एक खयाल है तेरा भुलाया नहीं जा रहा , खाना भी हलक से अंदर नहीं जा रहा । आओ ज़िंदगी बसर करनी है संग तेरे , बिन तेरे अब जिया भी नहीं जा रहा । होंगे कई गिले शिकवे मुझसे फ़िर , तुझसे कुछ क्यों कहा नहीं जा रहा । तेरा जाना कुछ इस कदर असर कर गया मुझपर , इन अश्कों के काफिलों को रोके रोका नहीं जा रहा । तबीयत कुछ नासाज़ है वो तो होनी थी , तुझको जो कई रोजों से देखा नहीं जा रहा । तुम रूठी हो मानो ज़िन्दगी रूठी हो मेरी , खुश करने को झूठ उगलवाया नहीं जा रहा । क्या करे तेरी तस्वीर का जो मुद्दतों से छुपा रखे है , बेवफ़ा कह कर सबको दिखलाया नहीं जा रहा । तीलियां जलाई जाती है तस्वीर जलाने को तेरी , तुझको छुआ जिन हाथों ने उनसे जलाया नहीं जा रहा । जल जाती है उंगलियां उन्हीं तीलियों से मिरी , नाराज़गी इतनी तीलियों को बुझाया नहीं जा रहा ।