देश के प्रति कर्तव्यों का भार आने दो
थम गई जो देश हित की
बयार आने दो ,
अब तो कोई जनहित की
सरकार आने दो .
क्या बिक सब गए इस
भारत देश में ,
जो बिका न हो अबतक वो
अखबार आने दो .
विविधताओं से भरा ये
देश है भारत ,
हर पुष्प की हो जिसमे
सुगंध वही हार आने दो .
भूल जाओगे बोलना देश
विरूद्ध सारी बातें ,
अपने ऊपर देश के
प्रति कर्तव्यों का भार आने दो .
जो मलिन बस्तियों में
आशाओं की रोशिनी लिए बैठे ,
यार उनको तो हर रोज़
इफ्तार खाने दो .
जो बच्चो में बाटे
दिल ख़ोल कर रुपया ,
घर में उसी तरह के
रिश्तेदार आने दो .
सब अपने है महज दो
बातो से दूर क्यों होना ,
जो ह्रदय से हो
संगठित वही परिवार आने दो .
जो बाँट दे हर अंग
हमें उसका क्या करना ,
जो बांटे एकता के
सूत्र में वही विचार आने दो .
यूं न बचाओ माँ हमें
अपने आँचल से ,
ज़रा हमें भी लू के
थपेड़ो की मार खाने दो .
आपका अपना शायर – अम्बरेश
कुमार यादव
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