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Showing posts from December, 2017

क्या सत्ताधारी का अर्थ अब कानून का पालन न करने वाला हो गया है ?

एक दिन की छुट्टी जिसमे प्रदेश की पूरी जनता का रुख चुनाव पे होता है | सुबह 7 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक किन्ही केन्द्रों में मतदाताओं की भीड़ बेशुमार होती है तो किसी केन्द्रों में सन्नाटा पसरा रहता है | जिस लखनऊ में इतने ऊँचे तबके के लोग रहते है , उसी जगह ३९% मतदान हो रहा है | वे चाहते क्या है ? लखनऊ विकास कर गया है तो और आगे बढ़ने की क्यों नहीं सोचते और मांग क्यों प्रदर्शित नहीं करते क्योंकि उन्हें पता है जो भी सत्ता आयगी वो उनकी मांगो को दबा देगी | अगर यही हाल रहा तो क्रांति शब्द को शब्दकोष से हटा देना चाहिए और ऐसे ही चलता रहा तो जनता के सेवक उन्ही पे तानाशाह बनकर उभरेगा और होता भी अक्सर यही है कि सत्ताधारी निरंकुश हो जाते है और ऐसे में जनता सभी नेतृत्वकर्ता को गलत समझ बैठती है | रुतबा तो रहता ही है साहब मंत्री पद की कुर्सी पर बैठने का, सीना चौड़ा , सर कभी झुकता नहीं , गाडियों का काफिला कभी रुकता नहीं कई चीजे जो वी.आई.पी कल्चर अभी भी बनी हुई है मात्र लाल बत्ती हटाने से वी.आई.पी कल्चर ख़त्म हो जाता तो देश में सुधार की किरण जगमगा उठती और तस्वीर में प्रतिदिन बदलाव आने लगता | यहाँ पर मुद्दे ख...

देश के प्रति कर्तव्यों का भार आने दो

थम गई जो देश हित की बयार आने दो , अब तो कोई जनहित की सरकार आने दो . क्या बिक सब गए इस भारत देश में , जो बिका न हो अबतक वो अखबार आने दो . विविधताओं से भरा ये देश है भारत , हर पुष्प की हो जिसमे सुगंध वही हार आने दो . भूल जाओगे बोलना देश विरूद्ध सारी बातें , अपने ऊपर देश के प्रति कर्तव्यों का भार आने दो . जो मलिन बस्तियों में आशाओं की रोशिनी लिए बैठे , यार उनको तो हर रोज़ इफ्तार खाने दो . जो बच्चो में बाटे दिल ख़ोल कर रुपया , घर में उसी तरह के रिश्तेदार आने दो . सब अपने है महज दो बातो से दूर क्यों होना , जो ह्रदय से हो संगठित वही परिवार आने दो . जो बाँट दे हर अंग हमें उसका क्या करना , जो बांटे एकता के सूत्र में वही विचार आने दो . यूं न बचाओ माँ हमें अपने आँचल से , ज़रा हमें भी लू के थपेड़ो की मार खाने दो .                        आपका अपना शायर – अम्बरेश कुमार यादव