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Showing posts from April, 2021

हद में रहकर इश्क़ कर रहे

बेवफ़ाओं से वफ़ा की बात नहीं चाहिए , खुदगर्ज की काएनात नहीं चाहिए , सहन करना अगर नामर्द की निशानी है , जाओ हमें मर्द की ज़ात नहीं चाहिए ।। रोटियां ख़ून में सान कर खा रहे , लूट के धन का ज़कात नहीं चाहिए ।। तुम्हारे ख्वाब की दुनिया में हम हैं तो ठीक , वर्ना तुम्हारे प्यार का खैरात नहीं चाहिए ।। तुम्हीं वस्ल की कोई तारीख़ तय करो , फ़ोन पर दिल के जज़्बात नहीं चाहिए ।। आज भी इतना शर्मा रही हो तुम , उतार आओ हमें ये ज़ेवरात नहीं चाहिए ।। हद में रहकर इश्क़ कर रहे , प्यार में "गुमनाम" औकात नहीं चाहिए ।।

चुनाव आयोग

व्यंग - निजीकरण की ओर सरकार का रुख कुछ इस कदर है की जिस प्रक्रिया से सरकार का गठन हुआ वही निजीकरण का शिकार हो गई है । पार्टी बयानों की ओर रुख किया जाए तो निष्कर्ष यही है की जब सारे विद्यालयों में शेयरिंग इस केयरिंग जैसी बातें सिखाई जाती हो तो किसी बीजेपी एमएलए की गाड़ी से वोटिंग मशीन का होना उसी शेयरिंग इज केयरिंग का एक हिस्सा है । संघफोर्ड से पढ़े अर्थशास्त्री सरकार को यह समझाने की कश्मकश में है की जिस संस्थान से मुनाफा नहीं हो रहा उसके हिस्से को बेच देना चाहिए और अंततः वो समझा भी ले गए और सरकार ने उस ओर रुख भी किया। पहले पीएसयू की बारी थी अब चुनाव आयोग की । चुनाव आयोग को भी निजी हाथों में दे देना चाहिए क्योंकि सरकार के बजट से एक बड़ी राशि चुनाव आयोग को दी जाती है और उससे सरकार के ऊपर अतिरिक्त भार बढ़ता है । मंत्रिमंडल की बैठक ने यह तय किया की चुनाव निजी कंपनियां करवाए जिससे नई तकनीक का इस्तेमाल होगा और चुनाव निष्पक्ष होंगे।  निजी कंपनियां लाभ की दृष्टि से काम करेंगी और उनके हो रहे लाभ से सरकार को कर मिलेगा । ईधर जो रुपए सरकार चुनाव आयोग को देती है वो बच जाएंगे उसे " दीन दयाल सां...