जो जाएगा जरूर वो भूखा रहा होगा

हर अफसाना वक्त से धुंदलका रहा होगा ,
दिल तुम्हारी मेज़बानी में झुका रहा होगा ,

रसोई के किवाड़ खुले छोड़ जा रहे ,
जो जाएगा ज़रूर वो भूखा रहा होगा ।

तुम्हारे कान में दाने निकल आए है ज़रूर
कोई कान में मेरे खिलाफ़ फूंका रहा होगा ।

चांद सालों बाद आने का वायदा कर गया ,
वो शम्स तब तक ढलने को रुका रहा होगा ।

ये जिंदगी की सिखाई सीख है गुमनाम ,
जो आज भीगा है कल सूखा रहा होगा ।।


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