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Showing posts from July, 2022

ध्यानी राजा

राज कार्य छोड़ एकांत में बैठ कर ध्यान कर रहे राजा दर्पण को जब ज्ञान की प्राप्ति हुई और यह जाना दुनिया में सत्कर्म की जगह बुरे कर्मों का बोलबाला क्यों हो रहा है तो वे सीधे वापस अपनी राजधानी लौट आए । राजा के राज्याभिषेक की घोषणा हुई और राजा को दुबारा गद्दी पे देखने के लिए जनता लालायित हो उठी और जिन्हें पिछली बार राजा में बुराई दिख रही थी वे भी इस बार राजा से प्रभावित होकर जन समर्थन का प्रदर्शन करने राजा के महल के बाहर पहुंच गए । पुनः राज्याभिषेक के बाद जब राजा का भाषण हुआ तो उन्होंने कहा कि लोगों के दुखों का कारण है दुखी होने के भाव और दुखी होने का शब्द , तो जिस शब्द से व्यक्ति दुखी होने के भाव को प्रकट कर पाए वो शब्द ही अगर शब्दकोश से निस्तारित कर दिए जाए तो लोगों के दुखों का अंत किया जा सकता है । राजा के भाषण के बाद कई विद्वान आए और शब्द की तलाश की गई और शब्दों को शब्दकोश से हटाया जाने लगा । चोरी , छीना झपटी , दुःख , पीड़ा , द्वेष , भ्रष्टाचार , भ्रष्टाचारी , छिनैती , डकैती , डकैत , चोट , चपेट , दर्द , पीड़ा , अन्य कई शब्दों को शब्दकोश से हटा दिया गया । लोग राजा के वापस आने पर बेहद प्र...

हुक्मरान

गौ माता के संरक्षण के लिए ट्वीट किए एक नेता के घर में जब लोग गौ संरक्षण की सीख लेने पहुंचे तो चार विदेशी नस्ल के कुत्तों का संरक्षण होते मिला । नेता जी से मिलने के लिए ज्ञापन दिया तो नेता जी के पीए ने बताया नेता जी अभी ज़रूरी मीटिंग में व्यस्त है थोड़े ही देर में आपसे मिलने आएंगे । दो नौकर अलग से कुत्तों की सेवा में लगाए गए थे और भौंकने पर खुद नेता जी भागकर आते देखते , चूमते और दुलारने लगते । इतने में भीड़ में खुसफुसाहट शुरू हो गई और जब लोगों के कई घंटों तक इंतज़ार करने पर नेता जी लोगों के पास नही आए और थक जाने के बाद लोग वापस जाने लगे तो भीड़ से ही एक व्यक्ति बोला की हमने अपना हुक्मरान चुना और नेता जी ने अपना ।।

अंतर्कलह

मन में ही उठे अंतर्कलह को दबाने की चेष्टा में जब राम अधीर की एक त्योरी ऊपर हो गई तो कैमरामैन फौरन डांटने लगा की बार बार बताने पर भी तस्वीर सही से नहीं खिंचवा रहे हो । राम अधीर थोड़ा संकुचाते हुए बोला की आज अगर समय से चॉकलेट ले आते तो मेम साहब का शुगर लेवल न गिरता । कैमरामैन बड़ी ही सहजता से बोला की तुम अपनी मेम साहब के शुगर के नीचे गिरने से परेशान हो मैं ऐसे लोगों को भी जानता हूं जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था चौपट कर दी और उनके देश की मुद्रा अपने इतिहास के सबसे निचले स्तर पर है तब भी वे तस्वीर खिंचवाते वक्त अपने चेहरे पे आत्मग्लानि और तनाव का एक शिकन नहीं आने देते । राम अधीर ने भी लंबी सांस भरी और अबकी चेहरे पे तनाव का एक शिकन नहीं आने दिया ।।

आपदा को अवसर में बदलना

जम्बूद्वीप में इन दिनों मानसून का मौसम है मगर इसके किसी प्रांत में सूखा तो किसी प्रांत में भारी बारिश हो रही है। महाराजा से लोगों ने शिकायत की " महाराज भारी बारिश के चलते ताल तलैया सब भर गए है , मछलियां बह गई है और नालियां पानी से पट गई है और पानी सड़क के ऊपर बह रहा है , फसल डूब गई है " महाराज कुछ कीजिए । जम्बूद्वीप के महाराजा को यह बात अंदर  ही अंदर कचोटी और इस बोझ को हल्का करने के लिए उन्होंने वहां के लोगों से एक तरफा संवाद स्थापित किया और अपने मन की बात शुरू की । उन्होंने अपना बचपन याद करते हुए कहा कि हमारा घर तो तराई क्षेत्र में था और हर वर्ष ही बाढ़ आ जाती तो मैं घबरा जाता तब मेरी मां कहती की हर पल का आनंद लेना चाहिए और आपदा को अवसर में बदलना चाहिए । उनके भाषण को सुनकर जम्बूद्वीप के लोगों के नीरस जीवन में रस ही रस भर गया । जम्बूद्वीप के लोग हर्षोल्लाश से भर गए । इस आपदा को अवसर में कैसे बदले इसका मंथन नगरपालिकाओं में भी चालू हो गया और साफ़ सफ़ाई बढ़ गई जिससे पानी और तेजी से निकलने लगा । बाढ़ के पानी को निकलता देख एक मंत्री झन्नाते हुए राजा के पास पहुंचा और बोला महाराज दे...

एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों

मृत्युलोक में इन दिनों मानसून का मौसम है मगर बादलों में यूं लग रहा मानों उनमें पानी का अभाव है । बारिशों के अभाव से मृत्युलोक के प्राणियों में छटपटाहट है और बादलों पर द्वेष की भावना से मुख से मनोहर शब्द बढ़ते जा रहे । जब धरातल का ताप बढ़ने लगा और प्राणियों की ऊर्जा रोजगार की ओर न लगने से माथे पर चढ़ने लगी तब मृत्युलोक के धरातल पर गर्मी और बढ़ गईं । इस ताप का असर राजा को न हो इसलिए मृत्युलोक के सचिवालयों में बैठे सचिव और राजा के मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया की राजमहल के एसी का तापमान 20 से घटा कर 18 किया जाए और कुछ नई एसी लगवाई जाए । राजमहल का तापमान गिरने से राजा की तबीयत बिगड़ने लगी और जब राजा का शरीर ठंड से अकड़ने लगा तो राजवैध ने सलाह दी की कुछ दिन राजा के शरीर को धूप की जरूरत है तो राजा ने निर्णय लिया की वे राज्य के दौरे पे जाएंगे क्योंकि कई दिनों से उनके कृत्रिम गुप्तचर (ड्रोन) के अस्वस्थ होने से उन्हें राज्य के लोगों का और सरकारी काम का भी हालचाल नहीं मिला है । राजा के राज्यभ्रमण का घोषणापत्र मृत्युलोक के हर चौराहों पे चस्पा दिया गया । जब मृत्युलोक के प्राणियों के दूतों ने ढोल मजीरो...