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Showing posts from September, 2019

फिर कभी

ठीक है, तुम रोज़ बातें ना करो मुझसे , लेकिन करती रहा करो मुझसे बातें कभी । बिन तेरे , बीत गई है रातें कई  , और बीत जाएंगी ये तारीखे कभी । वक़्त लंबा गुज़र गया है , आओ हम रूबरू हो जाए क...

यह इक्कीसवीं सदी का भारत है

देश चरित्र कहां जा पहुंचा दुष्कर्मियों के सायों में , या सत्ता पर काबिज बैठे अपराधियों के छायों में । यह इक्कीसवीं सदी का भारत है पूजनीय गाय काटी जाती है , बंद कमरों में लाच...

आओ बोल दे वो बातें जो कबसे ज़ुबां पे लाए बैठे है ।

एक दर्द है दिल में कबसे दबाए बैठे है  , इश्क भी उनसे कबसे जताए बैठे है , वो बाखबर हो कर भी बेखबर है , हम ही उनसे सारे वायदे निभाए बैठे है । हारे तो उसको पहले ही दिन थे यारों , लेकिन अब भी उसको इश्क़ में जिताए बैठे है । माना की वो सबसे खूबसूरत नहीं लेकिन , दिल तो हम अपना उनसे ही लगाए बैठे है । वो होठों के ऊपर तिल , और उसकी मुस्कुराहट , इन्हीं पर तो हम अपने होश गवाए बैठे है । और वो आंखों का काजल , जुल्फों का बिखरना , भीगे बालों पे तो उसके अपने दिल लुटाए बैठे है । अश्क भी उसकी यादों के साए में , इन आंखों पर कितने सितम ढहाए बैठे है । गाल पे उसकी इक बोसे की खातिर , यहां कितनों के हम दिल जलाए बैठे है । मिलता है उसके छुअन से सुकून मुझको , कबसे हम इन उंगलियों को तरसाए बैठे है । जानता हूं कि तुझको भी मिलता है सुकून बात करने पर , आओ बोल दे वो बातें जो कबसे ज़ुबां पे लाए बैठे है ।